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mahabharat 7.105.20-21h: सिन्धुराज जयद्रथ की ध्वजा के अग्रभाग पर चाँदी का बना हुआ तथा स्वर्णजाल से विभूषित, तेजस्वी सूर्य के समान श्वेत, वराह चिह्न अत्यन्त शोभायमान हो रहा था। 20 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.20-21h 
वराह: सिन्धुराजस्य राजतोऽभिविराजते॥ २०॥
ध्वजाग्रेऽलोहितार्काभो हेमजालपरिष्कृत:।
 
 
अनुवाद
सिन्धुराज जयद्रथ की ध्वजा के अग्रभाग पर चाँदी का बना हुआ तथा स्वर्णजाल से विभूषित, तेजस्वी सूर्य के समान श्वेत, वराह चिह्न अत्यन्त शोभायमान हो रहा था। 20 1/2॥
 
On the front of the flag of Sindhuraj Jayadratha, the Varaha symbol made of silver and adorned with a gold mesh, as white as the bright sun, was looking very beautiful. 20 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)