श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.105.19-20h 
सा सीता भ्राजते तस्य रथमास्थाय मारिष॥ १९॥
सर्वबीजविरूढेव यथा सीता श्रिया वृता।
 
 
अनुवाद
हे माननीय राजा! जैसे खेत में हल की नोक से खींची गई रेखा, जब सभी बीज अंकुरित हो जाते हैं, तब शोभायमान होती है, उसी प्रकार मद्रराज के रथ में आश्रय पाकर सीता (हल द्वारा खींची गई रेखा) अत्यंत शोभायमान हो रही थी॥191/2॥
 
O honourable king! Just as a line drawn with a light tip in the field looks beautiful when all the seeds have germinated, in the same way Sita (the line drawn by the plough) was looking very beautiful after taking shelter in the chariot of the Madra king.॥ 191/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)