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mahabharat 7.105.13-14h: युद्धस्थल पर स्वर्णमाला से सुशोभित कर्ण का ध्वज वायु से लहराता हुआ रथ के आसन पर नाच रहा था।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.13-14h 
पताका काञ्चनी स्रग्वी ध्वजे कर्णस्य संयुगे॥ १३॥
नृत्यतीव रथोपस्थे श्वसनेन समीरिता।
 
 
अनुवाद
युद्धस्थल पर स्वर्णमाला से सुशोभित कर्ण का ध्वज वायु से लहराता हुआ रथ के आसन पर नाच रहा था।
 
On the battlefield, the flag of Karna decorated with a golden garland was being swayed by the wind and was dancing on the seat of the chariot. 13 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)