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mahabharat 7.105.12-13h: अधिरथपुत्र कर्ण के ध्वज पर स्वर्णिम हाथी की रस्सी का चिह्न अंकित था। महाराज! युद्ध के समय वह आकाश में व्याप्त प्रतीत होता था। 12 1/2।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.12-13h 
हस्तिकक्ष्या पुनर्हैमी बभूवाधिरथेर्ध्वज:॥ १२॥
आहवे खं महाराज ददृशे पूरयन्निव।
 
 
अनुवाद
अधिरथपुत्र कर्ण के ध्वज पर स्वर्णिम हाथी की रस्सी का चिह्न अंकित था। महाराज! युद्ध के समय वह आकाश में व्याप्त प्रतीत होता था। 12 1/2।
 
The flag of Karna, son of Adhiratha, had the symbol of a golden elephant rope. Maharaj! It appeared to fill the sky during the battle. 12 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)