श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  7.105.11-12h 
काञ्चनं पवनोद्‍धूतं शक्रध्वजसमप्रभम्॥ ११॥
नन्दनं कौरवेन्द्राणां द्रौणेर्लक्ष्म समुच्छ्रितम्।
 
 
अनुवाद
अश्वत्थामा का ऊँचा सुवर्णमय ध्वज, इन्द्रध्वज के समान चमकता हुआ, वायु की प्रेरणा से फहराता हुआ, कौरव राजाओं के हर्ष को बढ़ा रहा था ॥11 1/2॥
 
Ashwatthama's high golden flag, shining like the Indra flag, was fluttering with the inspiration of the wind, increasing the joy of the Kaurava kings. 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)