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mahabharat 7.105.10-11h: भारत! इसी प्रकार हमने द्रोणपुत्र अश्वत्थामा का श्रेष्ठ ध्वज देखा, जो प्रातःकालीन सूर्य के समान चमक रहा था। उस पर सिंह की पूँछ का चिह्न था।   |   mahabharat अध्याय 7.105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.105.10-11h 
तथैव सिंहलाङ्गूलं द्रोणपुत्रस्य भारत॥ १०॥
ध्वजाग्रं समपश्याम बालसूर्यसमप्रभम्।
 
 
अनुवाद
भारत! इसी प्रकार हमने द्रोणपुत्र अश्वत्थामा का श्रेष्ठ ध्वज देखा, जो प्रातःकालीन सूर्य के समान चमक रहा था। उस पर सिंह की पूँछ का चिह्न था।
 
Bharat! Similarly, we saw the best flag of Drona's son Ashwatthama shining with the same glow as the morning sun. It had the symbol of a lion's tail. 10 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)