श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 105: अर्जुन तथा कौरव-महारथियोंके ध्वजोंका वर्णन और नौ महारथियोंके साथ अकेले अर्जुनका युद्ध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.105.1 
धृतराष्ट्र उवाच
ध्वजान् बहुविधाकारान् भ्राजमानानति श्रिया।
पार्थानां मामकानां च तान् ममाचक्ष्व संजय॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने कहा, 'संजय! मेरे और कुन्ती के पुत्रों के नाना प्रकार के ध्वजों का वर्णन करो, जो अत्यन्त शोभायमान थे।'
 
Dhritarashtra said, 'Sanjaya! Describe to me the various kinds of flags of my and Kunti's sons which were shining with great splendor.' 1.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)