Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.104.3: हे पृथ्वी के स्वामी! वे अपने सुनहरे पंखों वाले बाणों और क्रोध में भरे घोड़ों के समान अद्वितीय टंकार करने वाले धनुषों से सम्पूर्ण दिशाओं में तेज फैला रहे थे। | mahabharat अध्याय 7.104: अर्जुनका कौरव महारथियोंके साथ घोर युद्ध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे पृथ्वी के स्वामी! वे अपने सुनहरे पंखों वाले बाणों और क्रोध में भरे घोड़ों के समान अद्वितीय टंकार करने वाले धनुषों से सम्पूर्ण दिशाओं में तेज फैला रहे थे।
O lord of the earth! They were also spreading radiance in all directions with their golden-feathered arrows and their bows which made a matchless twanging sound like horses in rage.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥