श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनका कौरव महारथियोंके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  7.104.27-28h 
कर्णो द्वात्रिंशता चैव वृषसेनश्च सप्तभि:।
जयद्रथस्त्रिसप्तत्या कृपश्च दशभि: शरै:॥ २७॥
मद्रराजश्च दशभिर्विव्यधु: फाल्गुनं रणे।
 
 
अनुवाद
तब कर्ण ने बत्तीस, वृषसेन ने सात, जयद्रथ ने तिहत्तर, कृपाचार्य ने दस और मद्रराज शल्य ने भी दस बाण चलाकर अर्जुन को युद्धभूमि में बींध डाला। 27 1/2॥
 
Then Karna shot thirty-two arrows, Vrishasena seven, Jayadratha seventy-three, Kripacharya ten and Madra king Shalya also shot ten arrows and pierced Arjuna in the battlefield. 27 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)