श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनका कौरव महारथियोंके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.104.25 
कर्णं च दशभिर्विद्‍ध्वा वृषसेनं त्रिभिस्तथा।
शल्यस्य सशरं चापं मुष्टौ चिच्छेद वीर्यवान्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् पराक्रमी अर्जुन ने दस बाणों से कर्ण को और तीन बाणों से वृषसेन को घायल कर दिया तथा मुट्ठी से बाणों सहित राजा शल्य का धनुष भी काट डाला॥ 25॥
 
Then the valiant Arjuna wounded Karna with ten arrows and Vrishasena with three arrows and cut off King Shalya's bow along with the arrows from the fist.॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)