श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 104: अर्जुनका कौरव महारथियोंके साथ घोर युद्ध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.104.2 
सुवर्णचित्रैर्वैयाघ्रै: स्वनवद्भिर्महारथै:।
दीपयन्तो दिश: सर्वा ज्वलद्भिरिव पावकै:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे कौरव सैनिक व्याघ्रचर्म से आवृत, सुवर्णमय केशों से विभूषित तथा प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी, घोर शब्द करते हुए अपने विशाल रथों द्वारा सम्पूर्ण दिशाओं को प्रकाशित कर रहे थे॥ 2॥
 
Those Kaurava soldiers were illuminating all directions with their huge chariots, covered with tiger-skin, adorned with golden hair and making loud noises, as brilliant as a blazing fire.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)