Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.103.d1-41: नरेश्वर! जब भगवान श्रीकृष्ण के दोनों होठों से भरी हुई वायु शंख के भीतरी भाग में प्रविष्ट होकर दृढ़ होकर गम्भीर ध्वनि के रूप में बाहर निकली, उस समय असुरलोक, अंतरिक्ष, देवलोक और लोकपालों सहित सम्पूर्ण जगत भय के कारण विदीर्ण हो गया। उस समय शंख की ध्वनि और धनुष की टंकार से व्याकुल होकर, निर्मल और बलवान, समस्त शत्रु सैनिक पृथ्वी पर गिर पड़े॥41॥ | mahabharat अध्याय 7.103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! जब भगवान श्रीकृष्ण के दोनों होठों से भरी हुई वायु शंख के भीतरी भाग में प्रविष्ट होकर दृढ़ होकर गम्भीर ध्वनि के रूप में बाहर निकली, उस समय असुरलोक, अंतरिक्ष, देवलोक और लोकपालों सहित सम्पूर्ण जगत भय के कारण विदीर्ण हो गया। उस समय शंख की ध्वनि और धनुष की टंकार से व्याकुल होकर, निर्मल और बलवान, समस्त शत्रु सैनिक पृथ्वी पर गिर पड़े॥41॥
Nareshwar! When the air filled from both the lips of Lord Shri Krishna entered the inner part of the conch and got strengthened and came out in the form of a deep sound, at that time the entire world including Asurlok (underworld), space, Devlok and Lokpalaks seemed to be torn apart due to fear. At that time, all the enemy soldiers, clean and strong, distraught by the sound of the conch and the twang of the bow, fell on the earth. 41॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥