vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय
»
श्लोक 9
श्लोक
7.103.9
विस्मयो मे महान् पार्थ तव दृष्ट्वा शरानिमान्।
व्यर्थान् निपतितान् संख्ये दुर्योधनरथं प्रति॥ ९॥
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! आज युद्धभूमि में दुर्योधन के रथ के पास आपके बाण निष्फल पड़े देखकर मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा है।
O son of Kunti! I am very surprised to see your arrows lying ineffective near Duryodhan's chariot on the battlefield today.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×