श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.103.44 
बाणशब्दरवांश्चोग्रान् विमिश्रान् शङ्खनि:स्वनै:।
प्रादुश्चक्रुर्महात्मान: सिंहनादरवानपि॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उन महामनस्वी योद्धाओं ने भी शंखों की ध्वनि और सिंहों की गर्जना से युक्त बाणों से उत्पन्न होने वाली भयंकर ध्वनि उत्पन्न की ॥44॥
 
Those great-minded warriors also produced the fearful sounds produced by arrows mixed with the sound of conch shells and the roar of lions. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)