श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.103.40 
पाञ्चजन्यं च बलवान् दध्मौ तारेण केशव:।
रजसा ध्वस्तपक्ष्मान्ता: प्रस्विन्नवदनो भृशम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
बलवान केशवन ने बड़े जोर से पाञ्चजन्य शंख बजाया। उस समय उनकी पलकें धूल से भर गईं और उनके मुख पर पसीने की बहुत-सी बूंदें उभर आईं।
 
The strong Kesavana blew the Panchjanya conch in a loud voice. At that time his eyelids were getting dusty and many beads of sweat were appearing on his face. 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)