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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.103.4 
तेषां नैष्फल्यमालोक्य पुनर्नव च पञ्च च।
प्राहिणोन्निशितान् बाणांस्ते चाभ्रश्यन्त वर्मण:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इन्हें निष्फल देखकर अर्जुन ने पुनः चौदह तीखे बाण छोड़े; किन्तु वे भी कवच ​​से फिसल गये।
 
Seeing these ineffective, Arjuna again shot fourteen sharp arrows; but they too slipped off the armour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)