श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.103.33 
तं कृच्छ्रामापदं प्राप्तं दृष्ट्वा परमधन्विन:।
समापेतु: परीप्सन्तो धनंजयशरार्दितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
धनंजय के बाणों से आहत दुर्योधन को संकट में देखकर श्रेष्ठ धनुर्धर योद्धा उसकी सहायता के लिए आये।
 
Seeing Duryodhana in great trouble, struck by the arrows of Dhananjaya, the best archer warriors came to his rescue.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)