श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  7.103.21-22h 
संजय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनो बाणमभिमन्त्र्य व्यकर्षयत्॥ २१॥
मानवास्त्रेण मानार्हस्तीक्ष्णावरणभेदिना।
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं: हे राजन! ऐसा कहकर माननीय अर्जुन ने कठोरतम आवरण को भी भेदने वाले मानवास्त्र से अपने बाणों का आवाहन किया और धनुष की प्रत्यंचा खींची।
 
Sanjaya says: O King! Having said so, the honourable Arjuna invoked his arrows with the Manavastra, which could pierce even the hardest cover, and pulled the bowstring.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)