श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.103.2 
वासुदेवं च दशभि: प्रत्यविध्यत् स्तनान्तरे।
प्रतोदं चास्य भल्लेन छित्त्वा भूमावपातयत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार उसने दस बाणों से श्री कृष्ण की छाती छेद दी और भाले से उनका कोड़ा काटकर पृथ्वी पर गिरा दिया।
 
In the same manner he pierced Shri Krishna's chest with ten arrows and cut his whip with a spear and caused it to fall on the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)