श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.103.13 
न शक्यमेतत् कवचं बाणैर्भेत्तुं कथंचन।
अपि वज्रेण गोविन्द स्वयं मघवता युधि॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यह कवच किसी भी बाण से छेदा नहीं जा सकता। गोविन्द! स्वयं देवराज इन्द्र भी युद्धभूमि में अपने वज्र से इसे छेद नहीं सकते। ॥13॥
 
This armour cannot be pierced by any arrows. Govind! Even the king of gods Indra himself cannot pierce it with his thunderbolt on the battlefield. ॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)