श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.103.11 
अर्जुन उवाच
द्रोणेनैषा मति: कृष्ण धार्तराष्ट्रे निवेशिता।
अभेद्या हि ममास्त्राणामेषा कवचधारणा॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - "श्रीकृष्ण! मेरा विश्वास है कि द्रोणाचार्य ने दुर्योधन को अभेद्य कवच पहनाकर उसमें यह अद्भुत शक्ति स्थापित कर दी है। यह कवच मेरे अस्त्रों के लिए अभेद्य है।"
 
Arjun said - Shri Krishna! I believe that Dronacharya has installed this amazing power in Duryodhan by making him wear an impenetrable armor. This armor is impenetrable to my weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)