श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 103: दुर्योधन और अर्जुनका युद्ध तथा दुर्योधनकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.103.10 
वज्राशनिसमा घोरा: परकायावभेदिन:।
शरा: कुर्वन्ति ते नार्थं पार्थ काद्य विडम्बना॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! यह कैसी विडंबना है कि आपके वे बाण, जो वज्र और अश्कों के समान भयंकर हैं और शत्रुओं के शरीरों को छेद देते हैं, आज किसी काम के नहीं रहे?॥10॥
 
Partha! What an irony that your arrows, which are as dreadful as thunderbolts and ashenki and pierce the bodies of enemies, are of no use today?'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)