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mahabharat 7.102.9: पार्थ! देवता, दानव और मनुष्य तीनों लोक मिलकर भी तुम्हें युद्धभूमि में नहीं हरा सकते। फिर अकेले दुर्योधन की क्या सामर्थ्य है?॥9॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  7.102.9 
त्वां हि लोकास्त्रय: पार्थ ससुरासुरमानुषा:।
नोत्सहन्ते रणे जेतुं किमुतैक: सुयोधन:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! देवता, दानव और मनुष्य तीनों लोक मिलकर भी तुम्हें युद्धभूमि में नहीं हरा सकते। फिर अकेले दुर्योधन की क्या सामर्थ्य है?॥9॥
 
Partha! Even the three worlds including the gods, demons and humans cannot defeat you in the battlefield. Then what is the capability of Duryodhan alone?॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)