Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.102.8: हे पुरुष रत्न! धन के मद में चूर रहने वाला यह दुर्योधन कभी दुःखी नहीं हुआ। वह आपके बल और युद्ध में पराक्रम को नहीं जानता। | mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐश्वर्यमदसम्मूढो नैष दु:खमुपेयिवान्।
न च ते संयुगे वीर्यं जानाति पुरुषर्षभ॥ ८॥
अनुवाद
हे पुरुष रत्न! धन के मद में चूर रहने वाला यह दुर्योधन कभी दुःखी नहीं हुआ। वह आपके बल और युद्ध में पराक्रम को नहीं जानता।
O gem of a man! This Duryodhan who is always engrossed in the pride of his wealth has never suffered. He does not know about your strength and valour in war. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥