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mahabharat 7.102.7: धनंजय! सौभाग्यवश इस समय दुर्योधन आपके बाणों के मार्ग में आ गया है। आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि वह अपने प्राण त्याग दे।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  7.102.7 
दिष्टॺा त्विदानीं सम्प्राप्त एष ते बाणगोचरम्।
यथायं जीवितं जह्यात् तथा कुरु धनंजय॥ ७॥
 
 
अनुवाद
धनंजय! सौभाग्यवश इस समय दुर्योधन आपके बाणों के मार्ग में आ गया है। आपको ऐसा प्रयत्न करना चाहिए कि वह अपने प्राण त्याग दे।
 
Dhananjaya! Fortunately, Duryodhan has come in the path of your arrows at this time. You should make such an effort that he gives up his life. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)