Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.102.35: विजय की इच्छा रखने वाले राजा दुर्योधन ने अपने समस्त सैनिकों से ऐसा कहकर कुन्तीपुत्र को संबोधित किया और क्रोधपूर्वक इस प्रकार कहा ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.102.35 
इत्युक्त्वा सैनिकान् सर्वान् जयापेक्षी नराधिप:।
पार्थमाभाष्य संरम्भादिदं वचनमब्रवीत्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
विजय की इच्छा रखने वाले राजा दुर्योधन ने अपने समस्त सैनिकों से ऐसा कहकर कुन्तीपुत्र को संबोधित किया और क्रोधपूर्वक इस प्रकार कहा ॥35॥
 
Having said this to all his soldiers, King Duryodhana, who desired victory, addressed the son of Kunti and said angrily thus:॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)