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mahabharat 7.102.32: अन्य सभी कौरव भी शोकग्रस्त हो गए और उन्होंने यह मान लिया कि आपका पुत्र अग्नि में स्वाहा हो गया है।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.102.32 
शोकमापु: परे चैव कुरव: सर्व एव ते।
अमन्यन्त च पुत्रं ते वैश्वानरमुखे हुतम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
अन्य सभी कौरव भी शोकग्रस्त हो गए और उन्होंने यह मान लिया कि आपका पुत्र अग्नि में स्वाहा हो गया है।
 
All the other Kauravas also became grief-stricken and believed that your son had been sacrificed in the fire. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)