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mahabharat 7.102.31: उन दोनों को हर्ष से परिपूर्ण देखकर समस्त कौरव सैनिक आपके पुत्र के जीवन से निराश हो गये।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.102.31 
तौ हृष्टरूपौ सम्प्रेक्ष्य कौरवेयास्तु सर्वश:।
निराशा: समपद्यन्त पुत्रस्य तव जीविते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों को हर्ष से परिपूर्ण देखकर समस्त कौरव सैनिक आपके पुत्र के जीवन से निराश हो गये।
 
Seeing both of them full of joy, all the Kaurava soldiers became disappointed with the life of your son.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)