Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.102.30: तब श्रीकृष्ण और पाण्डवपुत्र अर्जुन ने हर्ष में भरकर बड़े जोर से गर्जना की और अपने उत्तम शंख बजाए।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.102.30 
तत: प्रहृष्टो दाशार्ह: पाण्डवश्च धनंजय:।
व्यक्रोशेतां महानादं दध्मतुश्चाम्बुजोत्तमौ॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तब श्रीकृष्ण और पाण्डवपुत्र अर्जुन ने हर्ष में भरकर बड़े जोर से गर्जना की और अपने उत्तम शंख बजाए।
 
Then Sri Krishna and Arjuna, son of Pandava, filled with joy, roared loudly and blew their excellent conches.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)