Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.102.3: कुन्तीकुमार! महारथी दुर्योधन बड़ा सुखी, प्रतिष्ठित और विद्वान पुरुष है। वह आप जैसे अपने मित्रों और सम्बन्धियों से सदैव द्वेष रखता है। | mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत्यन्तसुखसंवृद्धो मानितश्च महारथ:।
कृती च सततं पार्थ नित्यं द्वेष्टि च बान्धवान्॥ ३॥
अनुवाद
कुन्तीकुमार! महारथी दुर्योधन बड़ा सुखी, प्रतिष्ठित और विद्वान पुरुष है। वह आप जैसे अपने मित्रों और सम्बन्धियों से सदैव द्वेष रखता है।
Kuntikumar! Maharathi Duryodhana is a very happy and respected and learned man. He harbors constant hatred towards his friends and relatives like you. 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥