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mahabharat 7.102.29: आर्य! अर्जुन और श्रीकृष्ण को अत्यन्त क्रोध में भरे हुए देखकर आपके पुत्र ने जोर से हंसते हुए युद्ध की इच्छा से उन दोनों को ललकारा॥29॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.102.29 
दृष्ट्वा तु पार्थं संरब्धं वासुदेवं च मारिष।
प्रहसन्नेव पुत्रस्ते योद्‍धुकाम: समाह्वयत्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
आर्य! अर्जुन और श्रीकृष्ण को अत्यन्त क्रोध में भरे हुए देखकर आपके पुत्र ने जोर से हंसते हुए युद्ध की इच्छा से उन दोनों को ललकारा॥29॥
 
Arya! Seeing Arjuna and Shri Krishna filled with extreme anger, your son, laughing loudly, challenged both of them with a desire for war. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)