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mahabharat 7.102.27: जब आपके धनुर्धर पुत्र दुर्योधन ने उसे रोका, तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाला कुन्तीपुत्र अर्जुन उस पर पुनः अत्यन्त क्रोधित हो उठा।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.102.27 
आवारितस्तु कौन्तेयस्तव पुत्रेण धन्विना।
संरम्भमगमद् भूय: स च तस्मिन् परंतप:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब आपके धनुर्धर पुत्र दुर्योधन ने उसे रोका, तब शत्रुओं को पीड़ा देने वाला कुन्तीपुत्र अर्जुन उस पर पुनः अत्यन्त क्रोधित हो उठा।
 
When your archer son Duryodhana stopped him, Arjuna, son of Kunti and the tormentor of enemies, became very angry with him again. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)