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mahabharat 7.102.26: जिस समय वह भयंकर कोलाहल हो रहा था, उस समय आपके पुत्र ने बिना कुछ समझे ही अपने शत्रु को आगे बढ़ने से रोक दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.102.26 
तस्मिन् जनसमुन्नादे प्रवृत्ते भैरवे सति।
कदर्थीकृत्य ते पुत्र: प्रत्यमित्रमवारयत्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जिस समय वह भयंकर कोलाहल हो रहा था, उस समय आपके पुत्र ने बिना कुछ समझे ही अपने शत्रु को आगे बढ़ने से रोक दिया।
 
At the time when that terrible uproar was taking place, your son, without understanding anything, stopped his enemy from advancing. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)