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mahabharat 7.102.23: आर्य! भारतभूषण! आपका पुत्र उन दोनों के पास आकर भी नहीं डरा और उसे महान भय का अवसर भी मिला॥23॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.102.23 
तयो: समीपं सम्प्राप्य पुत्रस्ते भरतर्षभ।
न चकार भयं प्राप्ते भये महति मारिष॥ २३॥
 
 
अनुवाद
आर्य! भारतभूषण! आपका पुत्र उन दोनों के पास आकर भी नहीं डरा और उसे महान भय का अवसर भी मिला॥23॥
 
Arya! Bharatbhushan! Your son did not fear even when he came near both of them and got the opportunity of great fear. 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)