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mahabharat 7.102.22: इस प्रकार बातें करते हुए दोनों कृष्ण प्रसन्नतापूर्वक अपने उत्तम श्वेत घोड़ों पर सवार होकर युद्धस्थल में राजा दुर्योधन की ओर बढ़े, ताकि उसे अपना लक्ष्य बना सकें ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.102.22 
इत्येवंवादिनौ कृष्णौ हृष्टौ श्वेतान् हयोत्तमान्।
प्रेषयामासतु: संख्ये प्रेप्सन्तौ तं नराधिपम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बातें करते हुए दोनों कृष्ण प्रसन्नतापूर्वक अपने उत्तम श्वेत घोड़ों पर सवार होकर युद्धस्थल में राजा दुर्योधन की ओर बढ़े, ताकि उसे अपना लक्ष्य बना सकें ॥22॥
 
While talking in this manner, both Krishnas joyfully rode their excellent white horses toward King Duryodhana on the battlefield, to make him their target. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)