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mahabharat 7.102.21: माधव! जो द्रौपदी कष्ट सहने योग्य नहीं है और जिसका केश पकड़कर अपमान किया गया है, उसके दुःख का बदला मैं इस दुर्योधन को मारकर ही चुका सकता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.102.21 
अपि तस्य ह्यनर्हाया: परिक्लेशस्य माधव।
कृष्णाया: शक्नुयां गन्तुं पदं केशप्रधर्षणे॥ २१॥
 
 
अनुवाद
माधव! जो द्रौपदी कष्ट सहने योग्य नहीं है और जिसका केश पकड़कर अपमान किया गया है, उसके दुःख का बदला मैं इस दुर्योधन को मारकर ही चुका सकता हूँ।
 
Madhava! I can only repay the pain of Draupadi who is not worth suffering and who has been insulted by grabbing her hair, by killing this Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)