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mahabharat 7.102.20: मैं युद्ध में अपना पराक्रम दिखाकर दुर्योधन का सिर काट डालूँगा, जिसने दीर्घकाल तक हमारा निर्बाध राज्य भोगा है।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.102.20 
येनैतद् दीर्घकालं नो भुक्तं राज्यमकण्टकम्।
अप्यस्य युधि विक्रम्य छिन्द्यां मूर्धानमाहवे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्ध में अपना पराक्रम दिखाकर दुर्योधन का सिर काट डालूँगा, जिसने दीर्घकाल तक हमारा निर्बाध राज्य भोगा है।
 
I shall cut off the head of Duryodhana who has enjoyed our uninterrupted kingdom for a long time by displaying my prowess in the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)