Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.102.2: यह धृतराष्ट्र का पराक्रमी पुत्र दूर से ही लक्ष्य को मार गिराने वाला, महान धनुर्धर, अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण और युद्ध में निपुण है। इसके अस्त्र-शस्त्र बड़े प्रबल हैं और यह विचित्र प्रकार से युद्ध करता है। 2॥ | mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दूरपाती महेष्वास: कृतास्त्रो युद्धदुर्मद:।
दृढास्त्रश्चित्रयोधी च धार्तराष्ट्रो महाबल:॥ २॥
अनुवाद
यह धृतराष्ट्र का पराक्रमी पुत्र दूर से ही लक्ष्य को मार गिराने वाला, महान धनुर्धर, अस्त्र-शस्त्र विद्या में निपुण और युद्ध में निपुण है। इसके अस्त्र-शस्त्र बड़े प्रबल हैं और यह विचित्र प्रकार से युद्ध करता है। 2॥
This mighty son of Dhritarashtra is one who kills targets from far distances, is a great archer, adept in the art of weapons and is adept in battle. Its weapons are very strong and it fights in strange ways. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥