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mahabharat 7.102.19: संजय कहते हैं - हे राजन! तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने 'बहुत अच्छा' कहकर भगवान श्रीकृष्ण से कहा - 'यही मेरा सबसे बड़ा कर्तव्य है। अन्य सब कार्यों को छोड़कर आप उस स्थान पर जाएँ जहाँ दुर्योधन खड़ा है॥ 19॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.102.19 
संजय उवाच
तं तथेत्यब्रवीत् पार्थ: कृत्यरूपमिदं मम।
सर्वमन्यदनादृत्य गच्छ यत्र सुयोधन:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तब कुन्तीपुत्र अर्जुन ने 'बहुत अच्छा' कहकर भगवान श्रीकृष्ण से कहा - 'यही मेरा सबसे बड़ा कर्तव्य है। अन्य सब कार्यों को छोड़कर आप उस स्थान पर जाएँ जहाँ दुर्योधन खड़ा है॥ 19॥
 
Sanjaya says - O King! Then Kunti's son Arjuna said 'Very good' and said to Lord Krishna - 'This is the greatest duty I have got. Ignoring all other tasks, you should go to the place where Duryodhan is standing.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)