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mahabharat 7.102.17: हे कुन्तीपुत्र! जैसे पूर्वकाल में देवताओं और दानवों के युद्ध में इन्द्र ने जम्भ को मार डाला था, उसी प्रकार तुम भी युद्धस्थल में कुल के कलंक स्वरूप धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को मार डालो।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.102.17 
तस्माज्जहि रणे पार्थ धार्तराष्ट्रं कुलाधमम्।
यथेन्द्रेण हत: पूर्वं जम्भो देवासुरे मृधे॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! जैसे पूर्वकाल में देवताओं और दानवों के युद्ध में इन्द्र ने जम्भ को मार डाला था, उसी प्रकार तुम भी युद्धस्थल में कुल के कलंक स्वरूप धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन को मार डालो।
 
O son of Kunti! Just as Indra had killed Jambha in the war between gods and demons in the past, similarly you should kill Duryodhana, the son of Dhritarashtra, who is the disgrace of the family, in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)