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mahabharat 7.102.16: पार्थ! संयोगवश वह युद्धभूमि में आपके साथ युद्ध करना अपना कर्तव्य समझता है और संयोगवश आपकी सभी इच्छाएँ न चाहते हुए भी पूरी हो रही हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.102.16 
दिष्टॺा जानाति संग्रामे योद्धव्यं हि त्वया सह।
दिष्टॺा च सफला: पार्थ सर्वे कामा ह्यकामिता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! संयोगवश वह युद्धभूमि में आपके साथ युद्ध करना अपना कर्तव्य समझता है और संयोगवश आपकी सभी इच्छाएँ न चाहते हुए भी पूरी हो रही हैं।
 
Partha! By chance he considers it his duty to fight with you in the battlefield and by chance all your desires are coming true even though you don't want it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)