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mahabharat 7.102.15: यह तो सौभाग्य की बात है कि दुर्योधन आपके बाणों की पहुँच में घूम रहा है। यह भी सौभाग्य की बात है कि वह आपके सामने आकर आपके कार्य में बाधा डालने का प्रयत्न कर रहा है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.102.15 
दिष्टॺैष तव बाणानां गोचरे परिवर्तते।
प्रतिघाताय कार्यस्य दिष्टॺा च यततेऽग्रत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह तो सौभाग्य की बात है कि दुर्योधन आपके बाणों की पहुँच में घूम रहा है। यह भी सौभाग्य की बात है कि वह आपके सामने आकर आपके कार्य में बाधा डालने का प्रयत्न कर रहा है॥15॥
 
It is by good fortune that Duryodhan is moving around within the reach of your arrows. It is also fortunate that he is coming in front of you and trying to obstruct your work.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)