Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.102.14: हे पाण्डुपुत्र! दुर्योधन ने छल से तुम्हारा राज्य हड़प लिया है। तुम्हें वनवास का दुःख और द्रौपदी को जो दुःख और अपमान सहना पड़ा है, उन सब बातों को मन में स्मरण करो और अपना पराक्रम दिखाओ॥ 14॥ | mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निकृत्या राज्यहरणं वनवासं च पाण्डव।
परिक्लेशं च कृष्णाया हृदि कृत्वा पराक्रमम्॥ १४॥
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! दुर्योधन ने छल से तुम्हारा राज्य हड़प लिया है। तुम्हें वनवास का दुःख और द्रौपदी को जो दुःख और अपमान सहना पड़ा है, उन सब बातों को मन में स्मरण करो और अपना पराक्रम दिखाओ॥ 14॥
O son of Pandu! Duryodhan has usurped your kingdom by deceit. You have had to suffer the pain of exile and the pain and humiliation that Draupadi has had to endure - remember all these things in your mind and show your bravery.॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥