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mahabharat 7.102.13: हे पार्थ, युद्ध में अपनी श्रेष्ठ बुद्धि का प्रयोग करो और बिना विचारे ही इस स्वेच्छाचारी, सदा क्रोध से भरे रहने वाले दुष्ट पुरुष का वध करो ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.102.13 
तमनार्यं सदा क्रुद्धं पुरुषं कामचारिणम्।
आर्यां युद्धे मतिं कृत्वा जहि पार्थाविचारयन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे पार्थ, युद्ध में अपनी श्रेष्ठ बुद्धि का प्रयोग करो और बिना विचारे ही इस स्वेच्छाचारी, सदा क्रोध से भरे रहने वाले दुष्ट पुरुष का वध करो ॥13॥
 
Partha, use your superior intelligence in battle and without any thought kill this willful, evil man who is always full of anger. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)