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mahabharat 7.102.1: श्रीकृष्ण बोले- धनंजय! इस दुर्योधन को देखो, जो सबसे आगे निकल आया है। मैं इसे अद्भुत योद्धा मानता हूँ। इसके समान कोई दूसरा सारथी नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 7.102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 102: श्रीकृष्णका अर्जुनकी प्रशंसापूर्वक उसे प्रोत्साहन देना, अर्जुन और दुर्योधनका एक-दूसरेके सम्मुख आना, कौरव-सैनिकोंका भय तथा दुर्योधनका अर्जुनको ललकारना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.102.1 
वासुदेव उवाच
दुर्योधनमतिक्रान्तमेतं पश्य धनंजय।
अत्यद्भुतमिमं मन्ये नास्त्यस्य सदृशो रथ:॥ १॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण बोले- धनंजय! इस दुर्योधन को देखो, जो सबसे आगे निकल आया है। मैं इसे अद्भुत योद्धा मानता हूँ। इसके समान कोई दूसरा सारथी नहीं है।
 
Shri Krishna said- Dhananjay! Look at this Duryodhan who has come ahead of everyone. I consider him to be an amazing warrior. There is no other charioteer like him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)