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mahabharat 7.101.4: जैसे नास्तिक लोग वेदों (उनके द्वारा बताई गई विधियों) से दूर रहते हैं, वैसे ही वे दुष्ट मनुष्य अर्जुन के सामने जाकर भी पीछे हट गए (पीठ फेरकर भाग गए)। वे नरक में अपने पापों का फल भोगेंगे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.101.4 
असन्तस्तु न्यवर्तन्त वेदेभ्य इव नास्तिका:।
नरकं भजमानास्ते प्रत्यपद्यन्त किल्बिषम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
जैसे नास्तिक लोग वेदों (उनके द्वारा बताई गई विधियों) से दूर रहते हैं, वैसे ही वे दुष्ट मनुष्य अर्जुन के सामने जाकर भी पीछे हट गए (पीठ फेरकर भाग गए)। वे नरक में अपने पापों का फल भोगेंगे॥4॥
 
Just as atheists stay away from the Vedas (the methods prescribed by them), similarly those evil men, even after going in front of Arjun, turned back (turned their back and ran away). They will be suffering the consequences of their sins in hell. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)