श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  7.101.35 
तौ तु सैन्धवमालोक्य वर्तमानमिवान्तिके।
सहसा पेततु: क्रुद्धौ क्षिप्रं श्येनाविवामिषम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सिंधुराज जयद्रथ को निकट खड़ा देखकर दोनों वीर योद्धा क्रोधित हो उठे और अचानक उस पर टूट पड़े, मानो दो चील मांस पर झपट रहे हों।
 
Immediately upon seeing Jayadratha, the King of Sindhus, standing close by, both the brave warriors became enraged and suddenly fell upon him like two eagles pouncing on meat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)