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mahabharat 7.101.34: जैसे दो बाज मांस का टुकड़ा देखकर प्रसन्न होते हैं, वैसे ही द्रोणाचार्य की सेना से छूटे हुए वे दोनों वीर जयद्रथ को अपने पास देखकर प्रसन्न हुए ॥34॥   |   mahabharat अध्याय 7.101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.101.34 
हर्ष एव तयोरासीद् द्रोणानीकप्रमुक्तयो:।
समीपे सैन्धवं दृष्ट्वा श्येनयोरामिषं यथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जैसे दो बाज मांस का टुकड़ा देखकर प्रसन्न होते हैं, वैसे ही द्रोणाचार्य की सेना से छूटे हुए वे दोनों वीर जयद्रथ को अपने पास देखकर प्रसन्न हुए ॥34॥
 
Just as two eagles are delighted to see a piece of meat, similarly those two brave men, freed from Dronacharya's army, were delighted to see Jayadratha near them. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)