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mahabharat 7.101.28: उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो श्रीकृष्ण और अर्जुन ने वर्षा ऋतु में जल से भरी हुई तथा बड़े-बड़े ग्रहों से घिरी हुई छठी नदी सिंधु के साथ-साथ पांच समुद्रगामी नदियों इरावती (रावी), विपश्यना (व्यास), वितस्ता (झेलम), शतद्रु (शतलज) और चंद्रभागा (चनाब) को अपनी भुजाओं से तैरकर पार कर लिया हो।   |   mahabharat अध्याय 7.101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.101.28 
बाहुभ्यामिव संतीर्णौ सिन्धुषष्ठा: समुद्रगा:।
तपान्ते सरित: पूर्णा महाग्राहसमाकुला:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो श्रीकृष्ण और अर्जुन ने वर्षा ऋतु में जल से भरी हुई तथा बड़े-बड़े ग्रहों से घिरी हुई छठी नदी सिंधु के साथ-साथ पांच समुद्रगामी नदियों इरावती (रावी), विपश्यना (व्यास), वितस्ता (झेलम), शतद्रु (शतलज) और चंद्रभागा (चनाब) को अपनी भुजाओं से तैरकर पार कर लिया हो।
 
At that time it seemed as if Shri Krishna and Arjun had swum across the five sea-going rivers Iravati (Ravi), Vipashya (Beas), Vitasta (Jhelum), Shatadru (Shatlej) and Chandrabhaga (Chanab) along with the sixth river Sindhu, filled with water during the rainy season and surrounded by large planets, with their arms.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)