श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 101: श्रीकृष्ण और अर्जुनको आगे बढ़ा देख कौरव-सैनिकोंकी निराशा तथा दुर्योधनका युद्धके लिये आना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.101.12 
आशा बलवती राजन् सिन्धुराजस्य जीविते।
द्रोणहार्दिक्ययो: कृष्णौ न मोक्ष्येते इति प्रभो॥ १२॥
 
 
अनुवाद
राजन! हे प्रभु! सब लोग यह सोचने लगे कि श्रीकृष्ण और अर्जुन द्रोणाचार्य और कृतवर्मा के हाथों से बचकर नहीं निकल सकेंगे, सिन्धुराज के जीवन की आशा और प्रबल हो गई॥12॥
 
King! O Lord! Everyone thought that Shri Krishna and Arjun will not be able to escape from the hands of Dronacharya and Kritavarma, the hope for the life of Sindhuraj became stronger. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)